हमारे घर में कई बार रात के खाने के बाद कुछ रोटियां बच जाती है जिसे हम लोग सुबह उठ कर या तो गाय को डाल देते है या कुत्तों को या फिर उन्हें हम फेक देते हैं. क्योकि हम सभी जानते हैं की १२ घंटे से ज्यादा समय तक रखा हुआ खाना फ़ूड पोएसिनिन्ग जैसी समस्या उतपन्न कर सकता हैं वही हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार बासी रोटी खाना हमारी सेहत के लिए बहुत लाभकारी है. ताज़ी की जगह वासी रोटी में अधिक मात्र में पौष्टिक तत्व, न्यूट्रिएंट्स और प्रोटीन होते हैं बासी रोटी के फायदे 1. बसी रोटी खाने से ब्लड ग्लूकोज कंट्रोल में रहता है डायबिटीज के मरीजों के लिए बसी रोटी खाना बहुत लाभदायक है. 2.यह ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में भी मददगार होती है 3.पेट से जुडी प्रोब्लेम्स जेसे एसिडिटी पेट में जलन आदि समस्याओं से छुटकारा दिलाती हैं यह हमारे पाचन तंत्र को भी स्वस्थ्य रखती है. 4. वर्कआउट करने वाले लोगो के लिए भी काफी मददगार साबित होती है. बासी रोटी खाने से ज्यादा एनर्जी के साथ माषपेशियों में मजबूती आती है. 5. शरीर के टेम्परेचर को संतुलित व निंयत्रित रखती है इसे खाने से हाई स्ट्रोक जैसी समस्याओं का खतरा नहीं होता ...
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अगर दिखते हैं इस रूप में हनुमान जी सपने में, तो मिलेगा ये फल
दुनिया का हर एक व्यक्ति सपने ज़रूर देखता है। व्यक्ति जितने भी सपने देखता है उनमें से बहुत से सपने अच्छे होते हैं तो बहुत से बुरे भी होते हैं। व्यक्ति को सपने में बहुत सारी चीज़ें दिखाई दे जाती हैं जैसे कभी-कभी व्यक्ति को सपने में फूल दिखता है तो कभी सपने में दिखता है पैसा कभी इंसान को दिख जाता है सांप तो कभी दिख जाता है मोर पर व्यक्ति कभी भी ये जानने की कोशिश नहीं करता है कि आखिर सपने में देखी गई चीजों का मतलब होता क्या है। और ऐसा तो है नहीं कि सपने में देखी चीज़ बिना किसी मतलब के हो। हर चीज़ का मतलब ज़रूर होता है। आप में से बहुत से लोग सपने देखकर भूल जाते हैं पर कुछ लोग ऐसे भी हैं जो उन्हें देखकर भविष्य के संकेतों का पता लगाते हैं। जब इन चीजों में भविष्य के संकेत छुपे हुए होते हैं तो अगर आपके सपने में भगवान जी दर्शन दे जाए तो कितना फायदेमंद साबित हो सकता है खासकर जब हनुमान जी आपको अपने सपने में नजर आते हैं तो कितना फलदायक होता है। पर हनुमानजी ऐसे ही किसी के सपनों में नहीं आ जाते हैं। वो दुनिया में बहुत ही धनी किस्मत वाले व्यक्ति होते हैं जिनके सपने में हनुमानजी आकर दर्शन देते हैं। ...
माचिस का आविष्कार कब, किसने और कैसे किया
माचिस का आविष्कार अपने आप में काफी बड़ा है। माचिस की मदद से हम बिना मेहनत के आग जला सकते है। आपको पता ही होगा की माचिस के आविष्कार से पहले दो पत्थरो को आपस में रगड़कर आग जलाई जाती थी जो की काफी मेहनत वाला काम था। तो चलिए जानते है की माचिस का आविष्कार किसने , कब और कैसे किया था ? माचिस का आविष्कार 31 दिसंबर 1827 में हुआ था। माचिस के आविष्कार का श्रेय जॉन वॉकर को ब्रिटेन के एक वैज्ञानिक थे। लेकिन इनके द्वारा बनायीं गयी माचिस को इस्तेमाल करने में काफी ज्यादा मेहनत लगती है और यह काफी कठिन भी था। और इस माचिस को इस्तेमाल करने में भी काफी खतरा था। यह माचिस किसी भी खुरदरी जगह या लकड़ी पर रगड़ते ही आग पकड़ लेती थी। इस माचिस को बनाने के लिए लकड़ी की तिल्ली पर एंटिमनी सल्फाइड, पोटासियम क्लोरेट, बबूल का गोंद या स्टार्च लगाया जाता था। और इसे आग पकड़ने के लिए रेगमाल पर रगड़ा जाता था। जिससे माचिस पर जो मसाला लगा होता था वः जल उठता था। लेकिन इसके कारण जलते वक़्त चिंगारियो की छींटे छलकती थी और छोटे छोटे विस्फोट भी हो जाते थे। इसके आलावा तिल्ली पर लगे मसाले के जलने पर काफी बुरी गंध निकलती थ...







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